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मेरी शरारत !

वो फूल खिली मासूम कली
वो कल, और आज फिर मिली ||

वो म्रगनयनी थी, दूर खड़ी
चन्दन बदन ,आँखे बड़ी
जैसे ही वो पीछे मुड़ी
धक् धक् धक् धड़कन बढ़ी ||


मै गया था खो ख्वाबो में
दिल डूबा था शबाबो मे
फिर झूम झूम के नशा चढ़ा
झुप झुप देखू आँखे गड़ा ||

पीछे से एक आवाज आई
देखो देखो क्या आइटम है भाई
प्यार में धड़कन धीरे धीरे बढती है
आरे आइटम तो अपनी क्लास में ही पढ़ती है ||


इतना सुन हुआ मै खुश
गयी ताकत समझू बुश
अब था क्लास का इंतज़ार
था करना नयनो से प्यार ||

धीरे धीरे मैंने क्लास देखी
अपनी नजरे उस पर फेकी
पलट पलट वो मुझको देखी
पकड़ के कोना, नजरे सेकी ||

जब क्लास में सर पढ़ाते है
वो लाल छड़ी लहराते है
देख छड़ी मुझको, घूर घूर गुर्राती है
वही छड़ी जाने क्यों, देख उसे शर्माती है ||


धीरे धीरे वो मेरे पास को आई
पतली कमर मानो, दियासलाई
अब मै उससे क्या कहू भाई
बस लगे नजर, मेरी राम दुहाई ||



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